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रोहतास जिले के तिलौथू के बकनौरा गांव से निकल कर मायानगरी मुंबई में राजनीति में सफलता के झंडे गाड़ने वाले संजय निरुपम किसी पहचान के मोहताज नहीं

रोहतास- बिहार के रोहतास जिले के तिलौथू प्रखंड के बकनौरा गांव से निकल कर मायानगरी मुंबई में राजनीति में सफलता के झंडे गाड़ने वाले संजय निरुपम किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। 06 फरवरी 1965 को एक मध्यमवर्गीय कायस्थ परिवार में जन्मे निरुपम के पिता का नाम बृजकिशोर लाल और माता प्रेम देवी हैं। गांव से हीं प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद निरुपम 1980 में पटना चले आएं, जहां से इन्होंने 1986 में पाॅलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। संजय की शादी गीता निरुपम से हुई है। संजय की एक बेटी है शिवानी। शिवानी फैशन डिजाइनिंग में काफी एक्सपर्ट हैं और अपने पिता को सहयोग करती हैं। संजय निरुपम का सोशल मीडिया का काम शिवानी हीं देखती हैं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता के लिए प्रचार किया था और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बूथ मैनेजमेंट और डाटा एनालिसिस का काम शिवानी हीं देख रहीं हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद संजय ने दिल्ली का रुख किया। यहां उन्होंने पत्रकारिता शुरु कर दी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य में बतौर उप संपादक काम करना शुरु कर दिया। 1988 में संजय ने जनसत्ता ज्वाइन किया और उसके मुंबई संस्करण में काम करने के लिए मुंबई आ गए। 05 सालों तक जनसत्ता के लिए लिखने के बाद वो 1993 में शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के संपर्क में आ गए और दोपहर का सामना में जाॅब शुरु कर दिया। सामना में संजय के आलेखों में धार देखकर बाला साहेब ठाकरे ने अंदर हीं अंदर उन्हें पसंद करना शुरु कर दिया था। 1996 में शिवसेना ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए नामित किया और संसद पहुंच गएं।

ये वो दौर था जब शिवसेना को उत्तर भारतीयों और खासकर यूपी और बिहार के लोगों का विरोधी माना जाता था। शिवसेना वैचारिक तौर पर मुंबई में बिहारियों की बढ़ती संख्या से चिंतित थी, लेकिन संजय का टेलेंट बाकी सभी बातों पर भारी पड़ा।

संजय शुरु से हीं अच्छे लेखक के साथ अच्छे वक्ता भी रहे। राज्यसभा में इनके भाषणों को काफी सराहा जाता था और मंत्री भी बेहद चाव से इन्हें सुनते थें। तथ्यों को सरलता के साथ रखने की कला के कारण साथी सांसद अपने भाषण के लिए सलाह लेते रहते थें। दो बार राज्यसभा सांसद रहने के बाद संजय निरुपम का पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री प्रमोद महाजन के साथ विवाद शुरु हो गया। उन्होंने प्रमोद महाजन पर मंत्री रहते पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। संजय निरुपम ने महाजन पर मंत्री रहते रिलायंस इंडस्ट्रीज को नाजायज फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था।

प्रमोद महाजन शिवसेना प्रमुख के काफी करीबी माने जाते थें। ऐसे में संजय निरुपम का यहां रहना मुश्किल हो गया था। 2005 में संजय ने शिवसेना से अपने रिश्ते खत्म कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस में शामिल होने के बाद संजय लगातार मजबूत होते चले गए। 2009 में अभिनेता गोबिंदा की खाली की हुई मुंबई नाॅर्थ लोकसभा सीट से चुनाव लड़े निरुपम ने दिग्गज भाजपा नेता और वर्तमान राज्यपाल राम नाइक को शिकस्त दी। कांग्रेस संगठन में भी संजय ने पकड़ बनानी शुरु कर दी और सोनिया गांधी की कमिटी में बतौर सचिव काम किया। कुछ समय के लिए वो अपने गृह राज्य बिहार के भी कांग्रेस प्रभारी रहें। 2014 के मोदी लहर में सीट गंवाने के बाद संजय निरुपम को पार्टी संगठन में स्थान मिला और वो मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। संजय निरुपम अपने आंदोलनों के लिए भी खासे मशहूर हैं। इसके साथ हीं संजय न्यूज चैनल्स पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए भी नजर आते रहते हैं। वो संसद की कई आर्थिक कमिटियों में भी रह चुके हैं।

संजय निरुपम महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़े उत्तर भारतीय चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। मुंबई के जुहू चैपाटी पर पिछले 20 सालों से संजय छठ पूजा महोत्सव आयोजित कराते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय हिस्सा लेते हैं। संजय हिंदी साहित्य अकादमी, महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और मुंबई पारंपरिक कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं। प्रत्येक साल वो बड़े पैमाने पर इंटरनेशनल कुश्ती भी आयोजित करते हैं। संजय निरुपम बिग बाॅस सीजन-2 का हिस्सा भी रह चुके हैं। हालांकि वो इसमें काफी कम समय तक रह पाए थें।

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