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अररिया उपचुनाव: कांटे की टक्कर में प्रदीप कुमार सिंह बने भाजपा के खेवनहार-हरेन्द्र कुमार की एक रिपोर्ट

हरेन्द्र कुमार की एक रिपोर्ट

अररिया: सिमांचल के कद्दावर नेता राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद से खाली पड़े अररिया लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव का एलान हो चुका है। अररिया लोकसभा सीट से भाजपा के प्रदीप सिंह को उम्मीदवारी दी गई है। आरजेडी ने अररिया लोकसभा सीट से सरफराज आलम को उतारा है। जिले में चुनावी सरगर्मी तेज़ है, दोनों उमीदवार चुनावी समीकरण अपने पक्ष में होने के दावें कर रहें हैं।

नामांकन की प्रक्रिया 13 फरवरी से शुरू हो गयी है जो 20 फरवरी तक चलेगी। नामांकन वापस लिए जाने की आखिरी तारीख 23 फरवरी तक होगी। इस सीट पर चुनाव के लिए 11 मार्च की तारीख मुकर्रर की गई है। मतगणना 14 मार्च को होगी।

चूँकि चुनाव की तारीख अब नजदीक आ रही है, लिहाजा चुनावी सरगर्मी भी तेज हो चुकी है। ऐसे में चुनावी अखाड़े में जोर आजमाइश के लिए सभी दल कमर कस चुके हैं और अपने-अपने उम्मीदवारों की सूचि जारी करने में लग गए हैं। प्रदेश में बीजेपी और जदयू का गठबंधन है, लिहाजा इस सीट पर सहयोगी बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। वहीँ कांग्रेस और राजद का अलायंज है तो अब इस चुनाव में मुकाबला सीधे तौर पर बीजेपी और राजद दो मुख्य पार्टियों के बीच है।

तस्लीमुद्दीन का इंतेकाल कार्यावधि में हीं हो चुका है तो सिम्पैथी वोट के मद्देनजर आरजेडी ने दिवंगत तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम को उम्मीदवार घोषित किया है। सरफराज इससे पहले जदयू से विधायक रह चुके हैं जिन पर एक संगीन आरोप लगने के बाद जदयू ने ससपेंड कर दिया था।

इधर सबसे बड़े निर्णायक संसदीय क्षेत्र के वोटरों की माने तो बीजेपी कोटे से उनकी पहली पसंद भी प्रदीप कुमार सिंह हीं हैं। प्रदीप की उम्मीदवारी को लेकर लोगों के अन्दर खासा उत्साह नजर आ रहा है। लोगों का मानना है कि प्रदीप अररिया के लिए सबसे प्रभावशाली उमीदवार हैं। वजह साफ़ है प्रदीप नें 2009-2014 के कार्यकाल में ना सिर्फ़ सफलतापूर्वक उस क्षेत्र का नेतृव किया, बल्कि सिमांचल की सियासी तस्वीर भी बदली है। सबसे अलग उनकी छवि एक मिलनसार जमीनी नेता की रही है, जो जनता का वोट लेना हीं नहीं जनता के दिलों पर राज करना भी जानता है। कुल मिलाकर प्रदीप अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं जो भाजपा की डूबती नैया को पार लगा सकते हैं।

1967 से अब तक की राजनितिक तस्वीरों पर गौर करें तो अररिया में बीजेपी की जड़ें सबसे ज्यादा प्रदीप कुमार सिंह के कार्यकाल में मजबूत हुई है। आंकड़े बताते हैं कांग्रेस के बाद इस सीट पर राजद की पकड़ शुरू से हीं मजबूत रही है। सीट पर अब तक हुए कुल 13 चुनावों पर गौर करें तो यहां कांग्रेस ने चार बार, बीएलडी ने एक बार और राजद ने कुल पांच बार जीत हासिल की है। वहीं बीजेपी ने इस सीट पर कुल तीन बार जीत दर्ज कराई है जिसमें प्रदीप कुमार सिंह ने 2009-2014 यानी 5 वर्षों तक सफल कार्यकाल पूरा किया है।

गौरतलब है कि अररिया लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें 5 पर NDA काबिज है वहीं 1 सीट कांग्रेस के पास है।

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