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*बिहार-श्री के एस द्विवेदी के पुलिस महानिदेशक नियुक्त किए जाने के संबंध में आवश्यक तथ्य*

डेस्क:-आज पटना में गृह सचिव आमिर सोहानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने श्री के एस द्विवेदी को भारतीय पुलिस सेवा (1984) को पुलिस महानिदेशक के पद पर नियुक्त किया है । यह बिहार में कार्यरत पुलिस महानिदेशक स्तर के 4 पदाधिकारीयो में से सबसे वरीय है । इस स्तर पर बिहार में उपलब्ध अन्य तीन पदाधिकारी सर्व श्री रविंद्र कुमार (1964) सुनील कुमार (1987) एवं गुप्तेश्वर पांडे (1987) है । राज्य सरकार ने वरीयता और निगरानी स्वच्छता के आधार पर श्री द्विवेदी का चयन पुलिस महानिदेशक के पद पर किया है जो कि सर्वथा नियमानुकूल है। उल्लेखनीय है कि श्री द्विवेदी 2015 में ही पुलिस महानिदेशक स्तर से प्रोन्नत किए जा चुके थे। तथा पुलिस महानिरिक्षक के समकक्ष पदों पर सेवारत चल रहे थे । वही अमीर सोहानी ने कहा कि श्री द्विवेदी के पिछले सेवा इतिहास को लेकर कुछ चर्चाएं और प्रश्न उठाए जा रहे हैं । जिस पर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है ।श्री दिवेदी वर्ष 1989 में भागलपुर जिला में पुलिस अधीक्षक थे । जब वह जिला संप्रदायिक दंगे की चपेट में आया था। दंगे के कारण तथा उस समय जिला प्रशासन की भूमिका की जांच करने हेतु सरकार ने अध्यक्ष तथा 2 सदस्य (जो सभी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति थे) पर आधारित जांच आयोग का गठन किया था । जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री राम नंदन प्रसाद ने अपना जांच प्रतिवेदन अलग समर्पित किया । जबकि शेष 2 सदस्यों न्यायमूर्ति श्री रामचंद्र प्रसाद सिन्हा और न्यायमूर्ति श्री एस समसुल हसन ने अपना संयुक्त जांच प्रतिवेदन अलग समर्पित किया। आयोग के अध्यक्ष ने अपनी प्रतिवेदन के अध्याय 13 में श्री के एस द्विवेदी के द्वारा पुलिस अधीक्षक भागलपुर के रूप में दंगे के समय किये गए कार्यों की सराहना की तथा यह भी कहा कि उनके द्वारा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाए जाने तथा कर्तव्य के निर्वहन में कोताही करने का कोई साक्ष्य या प्रतिकूल तथ्य नहीं पाया गया है । दूसरी ओर जांच आयोग ने 2 सदस्य ने अपने जांच प्रतिवेदन में श्री द्विवेदी सहित अनेक पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका पर प्रतिकूल टिप्पणियां अंकित की। टिप्पणीयो के विरोध में श्री द्विवेदी सहित अनेक पुलिस पदाधिकारियों ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर प्रतिकूल टिप्पणियां को आयोग के प्रतिवेदन से खारिज करने का अनुरोध किया ।

उच्च न्यायालय ने उनके याचिकाओं में दिनांक 20/12/1996 को सम्मिलित रूप से आदेश पारित किया। रिट याचिका संख्या 5652/1995 में उपरोक्त तिथि को पारित आदेश में उच्च न्यायालय ने श्री द्विवेदी के विरुद्ध आयोग के दो सदस्यों के द्वारा की गई प्रति कुल टिप्पणियां को खंडित करते हुए, सरकार को निर्देश दिया कि उक्त प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर कोई अग्रतर कार्रवाई ना की जाए । राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील याचिका संख्या 168 -177/98 दायर की जिसेे उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया। इस प्रकार उच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी हो गया। उपरोक्त न्याय निर्णय के पश्चात राज्य सरकार ने श्री द्विवेदी सहित (1964) बैच के अन्य भा०पु०से० पदाधिकारियों की निगरानी स्वच्छता ,आरोप की स्थिति एवं योग्यता के आधार पर उन्हें वर्ष 1998 में भा०पु०से० के चयन ग्रेड में वर्ष 2000 में पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर में वर्ष 2005 में पुलिस महानिरिक्षक स्तर में वर्ष 2011 में अपर पुलिस महानिदेशक स्तर में और वर्ष 2015 में पुलिस महानिदेशक स्तर में प्रोन्नित प्रदान की ।

अतः स्पष्ट है कि वर्ष 1998 और उसके बाद सभी वर्षों में अब तक श्री द्विवेदी की सेवा इतिहास स्वच्छ रहा है और इस अवधि में उन्हें योग्यता के आधार पर 5 बार प्रोन्नित में भी प्रदान की गई है। उपरोक्त से भलीभांति स्पष्ट है कि पुलिस महानिदेशक के पद पर श्री द्विवेदी का पदस्थापना और चयन पूर्णता दिए नियमानुकूल एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से लिया गया सही निर्णय है।

 

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