पचरुखी सुगर मिल: सुशासन बाबू के ‘सर’ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें ; अपने ही क्षेत्र में करना पड़ सकता है लोगों के विरोध का सामना

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सरकारी तैयारी से सुशासन बाबू के ‘सर’ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

👉अपने ही क्षेत्र में करना पड़ सकता है लोगों के विरोध का सामना

सीवान :- पचरुखी चीनी मिल का मामला एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है।एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार को पढ़कर अब यहाँ के किसान आक्रोशित एवं आंदोलित होने लगे हैं।पूर्व में भी कई बार प्रशासन और ग्रामीणों में भिडंत की नौबत भी आ चुकी है।सुशासन बाबू द्वारा ‘सर’ कहे जाने वाले स्थानीय विधायक श्यामबहादुर सिंह भी पूर्व में आंदोलन में कूद चुके थे।लेकिन इधर विधायक की चुप्पी और सरकारी सूची में पचरुखी चीनी मिल का नाम नहीं देखकर लोगों में आक्रोश है।जो कभी भी गुस्सा बनकर फूट सकता है।लोग विधायक के खिलाफ भी आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं।बरहाल स्थानीय विधायक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।लोग विधायक की चुप्पी के गंभीर मायने भी निकाल रहे हैं।क्षेत्र में तरह-तरह की बातें हो रही हैं।
गुरुवार सात दिसम्बर को  एक दैनिक समाचार पत्र में पचरुखी के लोगों ने जब यह खबर पढा कि सूबे की 12 चीनी मीलों की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बसाने की सरकारी योजना अंतिम चरण में है तो लोग मायूस हो गए।मायुसी का कारण उस सूची में पचरुखी चीनी मिल की जमीन का नहीं होना था।खबर के मुताबिक सूबे की 12 चीनी मीलों की करीब 2245 एकड़ जमीन पहले अधिसंरचना विकाश प्राधिकार (आईडीए) को सौंपी जाएगी।फिर इसे बिहार राज्य औद्योगिक विकाश प्राधिकार (बियाडा) को दिया जायेगा।
राज्य में उद्योग लगाने के लिए जमीन की कमी है।निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार बंद चीनी मिल की जमीन को उपलब्ध कराएगी। उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ के हवाले से कहा गया है कि बंद पड़ी चीनी मीलों की जमीन को लेकर सरकार नई योजना बना रही है।

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